Source blog: Sujit Kumar Lucky
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अब सुबह की दो बातें, और रातों में उलझनों का बयाँ, क्या शायद तकलीफ दे रही थी ! कुछ दिन पहले ही तो खामोशी के, कई परतों को खोला था हमने, और सदियों के इंतेजार पर, वो दो टुक बस लिखना तेरा जवाब, फैसला और फासलों जैसी बातें, कितना कुछ था उसमें समाया ! वो […]